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देवास / वन

आष्टा से 35 किमी; तितली ~65; ईको बुकिंग

5 फरवरी 2026, 19:51। खिवनी अभयारण्य, विंध्य; देवास–सीहोर सीमा। क्षेत्रफल शीट का: लगभग 134 वर्ग किलोमीटर—देवास 89.9, सीहोर 44.8। जीव: बाघ, तेंदुआ, भालू समेत मांसाहारी सूची; चीतल, सांभर, चौसिंगा समेत शाकाहारी। पक्षी लगभग 170 प्रजाति; तितली करीब 65। दूरी: आष्टा से लगभग 35 किलोमीटर, भोपाल–इंदौर मार्ग। चित्र घास में एक बाघ का फ्रेम है, 170 पक्षी नहीं।

भोपाल / परागण

10–12 बजे; नेचुरलिस्ट कृति जैन और गणेश

29 अगस्त 2026 को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में प्रातः 10 से 12 बजे बटरफ्लाई रक्षाबंधन उत्सव। प्रतीकात्मक रक्षा सूत्र और संरक्षण संकल्प। नेचुरलिस्ट कृति जैन एवं गणेश ने जीवन-चक्र, आवास, परागण भूमिका बताई। सहायक संचालक ने मानव-निर्मित तितलियाँ रक्षा सूत्र के रूप में दीं। 3 अक्टूबर 2025 के शिविर में रेड पिरोट, कॉमन क्रो, स्ट्राइपड टाइगर आदि नाम हैं—वह अलग सुबह है। सुगंध इस उत्सव को प्रजाति जनगणना नहीं मानती।

जबलपुर / गड्डी

29वीं बैठक मंत्रालय, भोपाल

16 सितंबर 2026, 21:46। मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार, मंत्रालय, भोपाल। जबलपुर इंजीनियरिंग महाविद्यालय शासी निकाय की 29वीं बैठक और साधारण सभा की 15वीं। स्वीकृति: आधुनिक प्रयोगशाला उपकरण, विभागों की मरम्मत, ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल—कुल ₹12 करोड़। निर्देश: विभिन्न विभागों के भवनों पर सौर संयंत्र “स्थापित करने”—भविष्य। प्राचार्य डॉ. राजीव चांडक ने पालन और प्रगति प्रतिवेदन रखा। पद्म भूषण डॉ. अजय चौधरी, आरजीपीवी कुलगुरु प्रो. आलोक शर्मा सहित सदस्य। चित्र मंत्रालय बैठक का फ्रेम है, जबलपुर परिसर नहीं।

अशोकनगर / वैश्विक मंच

दुबई: चंदेरी-महेश्वरी मंच पर, फोटो बैठक की

6 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ताज दुबई, बिजनेस बे में मध्यप्रदेश के ओडीओपी और जीआई उत्पादों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। छह वस्तुएँ नामजद हैं: बैतूल बेल मेटल, अशोकनगर चंदेरी, खरगोन महेश्वरी, उज्जैन बाटिक, भोपाल जरी-जरदोजी, ग्वालियर कारपेट। उद्देश्य वैश्विक खरीदार तक पहुँच है। साथ वाली तस्वीर उसी दिन की कूटनीतिक बैठक की है, स्टॉल की नहीं।

गाँव का काम / देवास

मोरूखेड़ी की पहाड़ी पर 350 खाइयाँ, छतों का पानी सँभालने की भी व्यवस्था

मोरूखेड़ी में करीब एक हेक्टेयर पहाड़ी क्षेत्र में जनभागीदारी से 350 कंटूर ट्रेंच बनाई गईं। मई 2026 की रिपोर्ट इन्हें पंचायत के दूसरे जल-संचयन कामों के साथ दर्ज करती है।

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जंगल-पानी • कान्हा की दूसरी कहानी

कान्हा के बारहसिंगा: सिर्फ 66 बचे थे, फिर आबादी बढ़ी और दूसरे जंगलों तक पहुंची

घास के मैदान बचाने से लेकर खास बाड़ों और परिवहन ट्रकों तक—हार्ड ग्राउंड बारहसिंगा के संरक्षण में कई दशक लगे। कान्हा के अभिलेख बताते हैं कि यह काम कैसे हुआ।

स्रोत अपडेट

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